Monday, June 21, 2010
सोच-समझकर बोलना केवल दूसरों से आपके रिश्तों को प्रगाढ़ ही नहीं करता बल्कि उनके मन में आपके लिए सम्मान भी पैदा करता है। इतना ही नहीं इससे आपको एक और फायदा यह होता है कि आप किसी का दिल दुखाने से बच जाते हैं। गुस्से या अहंकारवश कहे गए शब्द भले ही उस समय आपके लिए मायने न रखते हों, लेकिन जब अकेले में आप उन पर मनन करें तो पाएँगे कि ऐसे शब्द आपने कैसे इस्तेमाल कर लिए? या फिर अगर ऐसे शब्द आपके साथ प्रयोग में लाए जाते तो? इसलिए किसी भी स्थिति में तौलकर बोलना व्यक्तित्व की सबसे बड़ी खूबी होती है। जो लोग इस बात को समझते हैं वे सभी की प्रशंसा के पात्र बनते हैं।
hum sath tumhare rehte hain...
hum chashm-e-tasveer se aksar...
tum ko dekhte rehte hain...
kuch khwaab sajaa kar aankho me......
hum pehro tum ko sochte hain...
har lamha tum par marte hain...
hum tumko dekh kar jeete hain...
hum aisi mohabbat karte hain...
hum aisi mohabbat karte hain...!!!
तमन्ना
अब इन हातो में ताकत कहा ?
इन कि लकीरे देखने तक की ...
नहीं थी फुर्सत हमें..
अब एक एक लकिरो को
गिनने के सिवा बचा क्या है ?
हजारो पलो को हम ने जिया है
ख़ुशी और गमो से
इन्ही हातो ने तुम्हे थामे रखा था
हर उस मोड़ पे
जहा जहा तुम गिर गए थे ..
हर मुसीबत झेली थी तुम्हारे लिए ..
हर पल को कुर्बान किया था
तुम्हारे ख़ुशी के लिए ..
बच्चो ,
हर बार की तरह इस महीने
और इस महीने से आगे,
पैसे न भेजना ..
तुम आ जाना..
तुम्हरे लिये आँखे बिछाये बैठा हु
एक बार गले लगाने को मन करता है ..
इस बार तुम आ जाना बेटा ..
सिर्फ तुम आ जाना
Dil ki bat samaj sako to samaj lo
Main rehta hoon is dharti pai,
par khwab aasmaan ke hi dekhta hoon,
Main khush hota hoon jab sab khush hote hai,
Main rota hoon jab kisi ke aankh Main aansoo hote hai,
Main sabke chehre pai muskurahat lana chahta hoon,
Khud ko bhulakar Main sabke saath muskurana chahta hoon,
Har dard har gum ko Main mita dena chahta hoon,
Har kisi ki zindagi Main Main sukh ka sagar chahta hoon,
Shayad hoon Main is duniya se anjaan
Par fir bhi kahin na kahin hoon Main apno ki jaan.
Wednesday, May 19, 2010
magar ..ab nahi hai mujhe is raah par chalna,apni insaniyat ko khudgarzi ke liye bechna khud ko kho kar nahi hain mujhe jeena,
ek kosish zaroor karunga,
zindagi ko jeene ke aihmiyat dekar jeeyunga.
Thursday, April 22, 2010
See the faults, but do not establish them within you. After seeing the faults, immediately establish flawlessness, becoming free of concern and hence forth resolve to not indulge in sins. Thereafter if someone says you are sinful, then become joyful and tell them at one time it was so, but now I it not so. In other words, do not see the sins of the past in the present
Beholding a saint, his touch, listening to his command, and anointing your head with the dust from his lotus feet are all far fetched, but he who thinks about the saint in his mind, he becomes purified and eligible for God Realization
जिंदगी ने खामोश कर दिया है मुझे
अपने आप से भी
अब मै बात नाही कर पाता हु.
सिकुड कर राख दिया है हालत ने
अपना प्रतिबिम्ब भी देखने को डर लगता है
जिंदगी की सारी परिभाषा भुल सा गया हु
नन्हासा ..कोमल है दिल मेरा
कितने आघात सहेगा ..
मेरी पहचान ही भुल सा गया हु
अब आइना भी मेरी शक्ल होने का
इंकार करता है ..
पर फिर भी सुकून है इस बात का
के तेरे रूह में ..
मेरे पहचान की ..
एक लौ सी जल रही है
काफी है मेरी सुकून के लिए ...
मेरे रक्त के हर बूंद बूंद में छटपटाता है
मेरा मन सागर की लहरों की तरह उछलता है
आकाश की ऊंचाई और सागर की
गहराई से होकर गुजरता हूँ मै
साँसे है के थम ने का नाम नहीं लेती
आसमानी खुशबु से सुगन्धित हो जाता हु मै
बारिश की बूंदों से वर्षित हो जाता हु मै
दिल दिमाग तहस नहस ओ जाता है
और कागज लेकर
मुझपे गुजरने वाली हर दास्ता को
शब्दबद्ध करने की कोशिश करता हु..
तुम ...
तुम जो हलके से
उतर आती थी
मेरे बदन पर हर
सुबहमेरे दिल की नमी के लिए...
वो काफी होता था ..
मेरे दिनभर के लिए ..
चांदनी की तरह उतर आती थी तुम
मेरे तन बदन पर हर शाम ..
वो काफी होता था मेरे रात भर के लिए ..
तेरी खुशबु ..तेरी बाते ..
तेरी मुस्कराहट . ..तेरी बाहे..
काफी होता थामेरे जिंदगी भर के लिए ..
अब तेरे साये से भी हटने को दिल नहीं करता ..
खुदा से दुआ मांगता हु के .
तेरे हातो की हिना में मुझे सजाये रख
वो काफी होगा मेरे आखरी सांस के लिये ..
विशुद्ध प्रेम वही है जो प्रतिदान में कुछ पाने की लालसा नहीं रखता। आत्मा की गहराई तक विद्यमान आसक्ति ही सच्चे प्यार का प्रमाण है।
सच्चे प्यार का अहसास किया जा सकता। इसे शब्दों में अभिव्यक्त करना न केवल मुश्किल है बल्कि असंभव भी है। सच्चे प्यार में गहराई इतनी होती है कि चोट लगे एक को, तो दर्द दूसरे को होता है, एक के चेहरे की उदासी से दूसरे की आँखें छलछला आती हैं। सच्चे प्रेम का 'पुष्प' कोमल भावनाओं की भूमि पर आपसी विश्वास और मन की पवित्रता के संरक्षण में ही खिलता और महकता है।
जब तुम्हारे दिल में मेरे लिए प्यार उमड़ आये,
और वो तुम्हारी आँखो से छलक सा जाए.......
मुझसे अपनी दिल के बातें सुनने कोयह दिल तुम्हारा मचल सा जाए..........
तब एक आवाज़ दे कर मुझको बुलानादिया है जो प्यार का वचन सजन,
तुम अपनी इस प्रीत को निभाना ............
तन्हा रातों में जब सनमनींद तुम्हारी उड़ सी जाये.......
सुबह की लाली में भी मेरे सजन,
तुमको बस अक़्स मेरा ही नज़र आये......
चलती ठंडी हवा के झोंके ....
जब मेरी ख़ुश्बू तुम तक पहुंचाए .
तब तुम अपना यह रूप सलोना ....
आ के मुझे एक बार दिखा जानादिया है जो प्यार का वचन साजनतुम अपनी इस प्रीत को निभा जाना
Saturday, April 17, 2010
जन्नत
मै तो तेरा ही था
तुने ही तो मुझे जिंदगी की सुबह दी थी
तेरे रस्ते पर चलना
काटो का ताज था ..
गिर गया मै ,
फिर संभला फिर खड़ा हुवा ..
कभी टुटा , कभी समेटा
इस दिल को कितने बार कांच की तरह संभाला..
तेरी दि हुवी पाक रूह को
पाक ही रखने की कोशिश की
हजारो कोशिश के बाद
आज इस मुकाम पर हु
तेरे दीदार का प्यासा हु
तेरे पास आना चाहता हु ..
ऐ खुदा ..
नहीं चाहिए जन्नत मुझे
ना ही चाहिए जहन्नुम ..
बस यही इल्ताजा है
वैसा हि ले ले अपने पास मेरी
मुझे जैसे मां के पेट मे
मै था एक रक्त कि बूंद ...
जनम से लेकर मरण तकका
सफ़र न पुछ मुझे
और न पुछ कोई हिसाब और किताब
मै बताने लायक नहीं हु... !
Thursday, April 15, 2010
प्यार
आज फिर से तुम्हे को पाना है
तेरी राह में चलते थक सा गया हु
और कहातक खुद को गिराना है
तेरी पायल की आवाज में
सनमगुम सा ये जमाना है
रूठकर तुमसे जाऊ तो कहा
खुद ही खुद से मनवाना है
मिट सा गया हु तेरे प्यार में
तेरा एक ही तो ये दीवाना है
पत्थर लेकर लोग खड़े है
फिर भी इन्हें अपनाना है
दिल तो छलनी हो गया
फिर भी यु मुस्कुराना है
मेरी आह तक नहीं सुनी लोगो ने
कहते है मौसम बड़ा सुहाना है
प्यार में तो ये चलता ही रहेगा
कुछ खोना है तो कुछ पाना है
You are my air
The sun in my day
The moon in my night
The spring in my step
You are my everything.
You are the stars in the sky
The birds in the trees
The shimmer, the sparkle, the shine.
Without the light you put into my life
I would be nothing
A single leaf on the ground in autumn,
Lost, forgotten, alone.
Before i knew you,
I was nothing.
Now I am everything,
With you at my side,
I am invincible!
Feel the same my baby,
You are loved so much,
I love you now and forever
You are my darling, my baby, my love
You are my everything
I love you so much.
Wednesday, April 14, 2010
पल...
कुछ हमें रुखसत करते है
कुछ पल दिल के कोने कोने को
महका देते है ..
कुछ तो इतने हलके होते है
के हम आसमा की ऊंचाई पाते है
कुछ इतने गहरे होते हैके जीवन
के सागर डूब जाते है..
कुछ पल दिलदार होते है
दोस्ती कर लेते हैकुछ पल दुश्मनी निभा देते है
कुछ पलो को हम पकड़ लेते है
तो कुछ पल फिसल जाते है ..
कुछ पल तन्हाई के
कुछ पल भीडभाड केकुछ पल मनाने के
कुछ होते है रुसवाई के
ऐ खुदा
ये क्या माजरा है
इंसान को क्या चाहिए ?
सिर्फ दो चार सुख के पल ही दे दे ..
जिस भाई या बहन से हम बचपन में लड़ते झगड़ते हैं और खेलते हैं उसके बारे में शायद ही कभी गहराई से यह सोचा जाता हो कि वह माँ- बाप की कितनी खूबसूरत देन है।
माँ-बाप तो हमेशा दुनिया में नहीं बैठे रहेंगे। तो उनके जाने के बाद कोई तो ऐसा हो जिससे इंसान जिंदगी में अपना सुख-दुख बाँट सके और इसके लिए भाई या बहन से बेहतर रिश्ता कोई नहीं हो सकता है।
भाई या बहन के साथ बचपन गुजारने वाले बच्चे अधिक आत्मविश्वासी कुशाग्र बुद्धि तथा सामंजस्य बिठाने वाले होते हैं।
आज एक तो कामकाजी माता-पिता के पास बच्चों के लिए वैसे ही समय नहीं है और उस पर यदि बच्चा घर में भी अकेला है तो वह किससे अपनी भावनाएँ व्यक्त करे किसके साथ खेले।
भले ही माँ- बाप कितना भी क्वालिटी समय बच्चे के साथ गुजारें लेकिन वह बच्चे के हमउम्र नहीं बन सकते। जो साथ बच्चे को अपने भाई बहन के साथ मिलता है उसकी किसी भी खिलौने से भरपाई नहीं की जा सकती।
सगे भाई बहनों में आपसी प्रतिद्वंद्विता भी होती है लेकिन यह स्वाभाविक है और समय के साथ यह अपने आप समाप्त हो जाती है। लेकिन भाई या बहन का रिश्ता शायद माँ-बाप के रिश्ते के बाद दुनिया का सबसे खूबसूरत रिश्ता होता है।
वे बच्चे बेहद खुशनसीब हैं जिनके भाई या बहन हैं क्योंकि माँ या बाप के बाद कोई भी बच्चा खुद को सबसे अधिक सुरक्षित अपने भाई या बहन की संगत में ही महसूस करता है।
दास्ताँ भाई-बहन के प्यार की।
भाई-बहन की उन शरारतों की, जिसे याद करते ही चेहरे पर मुस्कुराहट आ जाती है और खुल जाती है दास्ताँ भाई-बहन के प्यार की।
भाई-बहन का नाता प्रेम व स्नेह का होता है। इस रिश्ते में हमारा बचपन कैद होता है, जिसे हमने बेफिक्र होकर पूरे आनंद से जिया है। हालाँकि आज हम रिश्तों के कई पायदानों पर चढ़ गए हैं परंतु हम अपना सुनहरा बचपन नहीं भूले हैं।
आधुनिकता की आँधी की मार झेलकर भी यह रिश्ता आज भी उतना ही पाक़ है। आज भी भाई-बहन में उतनी आत्मीयता और अपनापन है कि एक का दर्द दूसरे को महसूस होता है। दोनों एक-दूसरे के दु:ख-दर्द व खुशियों में शरीक होकर उन्हें सहारा देते हैं
यह रिश्ता आत्मीयता का रिश्ता होता है जिसे दिल से जिया जाता है। बचपन तो भाई-बहन की नोक-झोंक व शरारतों में गुजर जाता है।
भाई-बहन के रिश्ते की अहमियत तो हमें तब पता लगती है जब हम युवा होते हैं। जब हमारे बच्चे होते हैं। उनकी शरारतें हमें फिर से अपने बचपन में ले जाती हैं।
हर रक्षाबंधन पर बहन, भाई का बेसब्री से इंतजार करती है और भाई भी मीलों के फासले तय करके अपनी बहन को लेने जाता है। यही नहीं हर त्योहार पर बधाइयाँ देकर एक-दूजे के सुखी जीवन की कामना करते हैं।
माँ-बाप की डॉट-फटकार से अपने प्यारे भाई को बचाना हो या चुपके-चुपके बहन को कहीं घुमाने ले जाना हो... यह सब भाई-बहन को बखूबी आता है।
बचपन में हमने भी बहुत सारे बहाने किए, माँ-बाप की डॉट भी खाई पर वही किया जो हमें पसंद था। हमारी उन शरारतों में भी एक प्यार छुपा था, जिसकी तलाश आज भी हम करते हैं।
आधुनिकता की आँधी की मार झेलकर भी यह रिश्ता आज भी उतना ही पाक़ है। आज भी भाई-बहन में उतनी आत्मीयता और अपनापन है कि एक का दर्द दूसरे को महसूस होता है। दोनों एक-दूसरे के दु:ख-दर्द व खुशियों में शरीक होकर उन्हें सहारा देते हैं और ऐसा होना भी चाहिए।
यह प्यार ताउम्र बना रहे और भाई-बहन एक-दूसरे का साथ जीवनभर निभाएँ। ऐसी ही आशा है। रिश्ते की इस डोर को प्यार व समझदारी से थामें रखें ताकि रिश्तों में मधुरता सदैव बरकरार रहे।
मेरी बहेना
बहन अगर खुशियों का खजाना होती है तो भाई उस खजाने की चाबी। सच कहें तो भाई के जीवन में रौनक ही बहन से होती है। वो बहन ही होती है जिसको तोहफा देने के लिए कभी वो पॉकेटमनी के पैसे इकट्ठा करता है तो कभी छोटी-सी बात पर किसी से भी लड़ पड़ता है। और वही बहन उसकी जिंदगी होती है जो उसे छेड़ती है, लडाई BHI भी कर लेती है, लेकिन उसी से सबसे ज्यादा प्यार भी करती है।एक भाई से अच्छा सलाहकार बहन के लिए कोई हो नहीं सकता।
बहन अपनी कोई गलती भाई से छिपा नहीं सकती। बता ही देती है और भाई भी उससे कुछ दुराव-छिपाव नहीं रखता। वह हमेशा उसकी मदद को तत्पर रहता है। बहन को दर्द होने पर वह आँख भाई की ही होती है जिसमें सबसे पहला आँसू भर आता है। बहन कभी कहती नहीं मगर महसूस करती है कि उसके लिए जान तक पर खेल जाने वाला उसका भाई उससे बेइंतहा प्यार करता है। और यही उनके रिश्ते की शक्ति होती है।
सचुमुच बड़ा अनोखा होता है भाई बहन का प्यार अनमोल रतन होता हे कोहिनूर से ज्यादा कीमती होता है । इश्वर की और गुरु देव की जिसके उपर इनायत होती है उसे मिलती है मासूम गुडिया सी बहेना .आँखों का नूर और दिल का सुरुर होती है प्यारी बहना । मेरी प्यारी बहेना को बहोत सारे प्यार की साथ समर्पित है यह छोटा सा प्यार भरा पैगाम और याद
प्रेम
सच्चे प्रेम की हमारे जीवन में बहोत ही आवश्यकता हैवो प्रभु से कहते है न के "हे प्रभु हम तो तेरे चरणों की धुल है"ये सब कहने की बाते है, धुल है या नहीं ये हम अन्दर से अच्छी तरह से जानते है, कहने की जरुरत ही नहीं है, और प्रभु भी जानता है की हम क्या हैझूठे प्रेम, दिखावे का प्रेम तो चल नहीं सकता,खोटा सिक्का नहीं चलेंगा, चलेंगा तो सच्चा प्रेम चलेंगा,कब तक दिखावा करेंगे, जीवन भर तो दिखावा करते रहते है, जीवन ही उलट फेर, हेर फेर हैकिसी को कुछ बोला, किसी को कुछ बोला,अभी कुछ तो कभी कुछ,आप जो हो वो हो, बदलते रहते है हम हर पल,किसी के सामने कुछ, किसी के सामने कुछ....
Tuesday, April 13, 2010
जिंदगी ..
आंसू छलक आते है
न जाने क्यों ..
ऐसे ही आखो में तैरने लगते है ..
मुझे किसी ने कहा था
कभी जीवन में आंसू न निकालना
जीते रहना ..लढते रहना
जबतक लक्ष्य को नही पाये
तबतक जिंदगी से न हारना
मै भी बड़ा कठोर बन गया
ह्रदय को विशाल की जगह मजबूत कर दिया
हजारो भावनाओ को क़त्ल कर दिया
जिंदगी को कई जगह हरा दिया
इतना कठोर हो गया
के आखे पत्थर सी हो गयी..
पर न जाने क्यों
ऐसा क्यों होता है ...
आजकल एक हवा का झोका भी मुझे रुला देता है ..
ऐ खुदा..
जीवन से लेकर मरण तक
हजारो सुख दुःख के पल जीते जीते
न जाने आदमी कितनी मंजिले पार करता है
सर उठा के जीने के लिए
कितनी बार मन को
गिरवी रखता है..
उधार का सुख . ,
मज़बूरी का दुःख..
माँ के गोदी से निकल कर
इस ज़माने में तीथर बिथर हो जाता है..
रोटी , कपडा और मकान के चक्कर में
आम आदमी आम ही रह जाता है..
मान.. अपमान..कितने बार उठेगा ..
कितने बार गिरेगा..
हक की आवाज दबाई जाती हैचिल्लाओ तो लोग दीवाना कहते है
रूठो तो लोग बावरा कहते है..
अकेला कबतक लढु मै ज़माने से..
ऐ खुदा ..एक हि दुवा है तुझसे
या तो कोई दिशा दे दे मुझको
या मुझे दिशाहीन कर दे ..
दोस्ती
कभी कभी लगता है
बल्कि उसकी आत्मा को चूम लू..
आत्माए मिलने पर ही तो दोस्ती बन जाती है..
रूह की रूह को खबर होती है
दोस्ती तो आसमानी होती है..
कभी बदली सी छा जाती है तो कभी ये नूरानी होती है..
मेरे यार तुझको सलाम ..
मेरे आखरी सांस तक
मेरी आंखो मे विश्वास बन के रहना
मेरे जीवन मे मेरा श्वास बनके रहना
Monday, April 12, 2010
फिर तुम क्यों नाराज़ खुदी सेएक सरल मुसकान बिखेरो ,
जगती के सुंदर जीवन सेसुंदर नयनों को न फेरो.
ये संसार देव नगर है ,जिसमें मिलती कई डगर हैं .
रुके -खड़े क्यों !क्या उलझन है !
अपने कदम बढ़ा कर देखो,
साथ चलेंगे कितने पग फिरएक बार अपनाकर देखो
जीवन में कैसी देरी है ,
जीवन में कैसी जल्दी है ,
जीवन में क्या खो जाना है ,
जीवन में क्या मिल जाना है ,
मेरी आँखों से तुम देखो जग जाना और पहचाना है.
नहीं अकेले इस सागर मेंलहर-लहर का मिल जाना है.
मेरे शब्द उठा कर देखोशब्द गीत हर हो जाना है.
सागर अपने मन -दर्पण मेंचाँद समेटे रख सकता है ,
और हवाओं का ये आँचलसुमन झोली में भर सकता है ,
फिर न कहना कि मौका न मिला,
लगा है मेरा आज सर्वस्व दांव पर,
लूट मची है तुम भी भर लो दामन,
प्रेम बचा है अंतर में.. है भरा ठूँस-2,
यूँ भी है अधिकार तुम्हारा मुझ पर,
लगे हैं मेले चारों तरफ लूटखोरों के,
फिर क्यों पीछे तू भी रहे आ लूट मुझे,
जी रहा हूँ जीवन तेरी आशा से रहित,
नहीं है तू.. अब लग रही बोलियाँ हैं,
मन बैठा सोच रहा कौन घडी थी वह,
मैंने जब तुझसे लगाया अपना दिल,
"तीस बरस" बाकी जीवन के तेरे बिन,
बिन तेरे अब उनको जी पाउँगा कैसे,
एक पहर भी अब जी पाना मुश्किल है,
अरसा है लम्बा अब जी पाउँगा कैसे,
माँग लो आज मुझको मुझी से तुम,
फिर न कहना कि मौका न मिला,
लगा है मेरा आज सर्वस्व दांव पर !!
Sunday, April 11, 2010
Mere Guruvar
mera data , mere ram ,mere dukh bhanjan ,mere moula , mere sache sathi , tere bin na koi aur sahara , bas le le apni sharan me baksh le muje mere har gunaho ke liye , nahi janta kya jiwan hai , nahi janta kya tera simran aur puja hai bas dil de betha hu tuje ab is dil se kabhi dur mat karna mere data
उम्र भी जी लो...
बयां कर जाते बहुत कुछ, मगर कभी कुछ ना कहते.
तुम्हारी हर छोटी छोटी बात, और हर एक बात मुझे बहुत ही भाती है,
ऐसा कोई पल नहीं, जिसमे तुम्हारी याद नहीं आती है.
इतने शांत होकर भी इतने नटखट हो,
कभी एकदम बुज़ुर्ग तो कभी बच्चे हो,
लगते बहुत अच्छे हो, मगर एक ही शिकायत है,
कभी अपनी उम्र भी जी लो...
बन्नो हमारी
वो चाँदतारा वर माँगती है
बन्नो हमारी है चाँदतारा,
वो चाँदतारा वर माँगती है॥
ढोलक की थाप और घर में गूँजते ये विवाह के गीत सुन मन मयूर नाच उठता है। बेटी के ब्याह की सोच-सोच ही ऐसा लगने लगता है, मानो सारे जहाँ की खुशियाँ हाथ लग गई हों, सारे सपने पूरे हो गए हों। सच ही तो है! बेटी के जन्म के साथ उसको स्पर्श करते ही न जाने कितने रंग-बिरंगे खुशियों की सौगात से परिपूर्ण सपने आँखों में तैरने लगते हैं।
ज्यों-ज्यों वो बड़ी होती जाती है, त्यों-त्यों ख्वाब के साकार होने की इच्छा भी माता-पिता की बलवती होने लगती है और वे तन-मन धन से उन्हें पूरा करने में लग जाते हैं।
यही फिर उनके जीवन का एकमात्र उद्देश्य रह जाता है कि बेटी को सिर्फ और सिर्फ सुखी संसार ही मिले। कैसी भी परेशानी अथवा दुःख की घड़ी सदा-सदा कोसों दूर रहे।
सुख-दुख
सभी जानते हैं कि सुख-दुख जीवन के दो पहलू हैं जिनका क्रमानुसार आना-जाना लगा ही रहता है। किंतु हम सब कुछ जानते-समझते हुए भी दोनों ही वक्त अपनी भावनाओं-संवेदनाओं पर नियंत्रण नहीं रख पाते। जब खुशियों के पल हमारी झोली में होते हैं तो उस समय हम स्वयं में ही इतने मग्न हो जाते हैं कि क्या अच्छा क्या बुरा, इस पर कभी विचार नहीं करते हैं।
अपनी किस्मत व भाग्य पर इठलाते हुए अन्य की तुलना में श्रेष्ठ समझते हैं और अहंकारवश कुछ ऐसे कार्य तक कर देते हैं जिनसे स्वयं का हित और दूसरे का अहित हो सकता है। इस क्षणिक सुख को स्थायी मानते हुए ही जीने लगते हैं और वास्तव में यही सोच अपना लेते हैं कि अब हमें क्या चाहिए, सब कुछ तो मिल गया। बस! एक इसी भ्रांति के कारण स्वयं को उतने योग्य व सफल साबित नहीं कर पाते जितना कि कर सकते थे।
इसी तरह दुःखद घड़ी में भी अपना आपा खो बेसुध होकर सब भूल जाते हैं। छोटे-से छोटे दुःख तक में धैर्य-संयम नहीं रख पाते। बुद्धि-विवेक व आत्मबल होने के बावजूद स्वयं को इतना दयनीय, असहाय व बेचारा महसूस करते हैं कि आत्मसम्मान, स्वाभिमान तक से समझौता कर लेते हैं। यही कारण है कि सब कुछ होते हुए भी उम्रभर अयोग्य-असफल होने लगते हैं।
कहने का सार यह है कि जो भी छोटी-सी जिंदगी हमें मिली है उसमें सुख व दुख दोनों ही से हमारा वास्ता होगा, यही शाश्वत सत्य है। इस सच को हम जितनी जल्दी स्वीकार कर लेंगे उतना ही हमारे लिए अच्छा रहेगा, क्योंकि फिर ऐसा समय आने पर हम अपने संवेगों पर काबू कर उन्हें स्थिर रख सकेंगे।
कुछ ऐसे होते हैं जो आपका दुख-दर्द सुन तो लेते हैं पर उससे ज्यादा वे और कुछ नहीं करते। जिनसे आपकी महीनों बात नहीं होती पर मुसीबत में आप उन्हें फोन करते हैं और आपकी बातों और आवाज से उन्हें लगता है कि आपको उनकी हमदर्दी की जरूरत है। वह आपसे परेशानी पूछते हैं, आपको दिलासा देते हैं और उनसे कुछ बन पड़ता है तो वे आपके लिए करते भी हैं।
पर, कई बार आप एक विचित्र से रिश्ते में पड़ जाते हैं। न तो उसका कोई नाम होता है और न ही आपको यह पता होता है कि आपका उस व्यक्ति पर कितना अधिकार है। इतना ही नहीं, आपका उस व्यक्ति के प्रति क्या कर्तव्य होना चाहिए यह भी आप नहीं समझ पाते हैं। कभी आप उससे हफ्तों नहीं मिलते और जब मिलते हैं तो खूब अधिकार से झगड़ा करते हैं। आपकी यही ख्वाहिश होती है कि आपको वह मनाए, आपकी सारी शिकायतों पर माफी माँगे, कान पकड़े और सारी गलतियों को सर आँखों पर ले। आपको दिल व जान से प्यारा होता है।
एक पल ही जीना
पानी की एक बूंद ही काफी है !
किसी की जिंदगी बसाने को ,
प्यार भरी एक साँस ही काफी है !
जीवन के मोती बनाती है सीप बहुत ,
उसे पानी की एक बूंद ही काफी है !
जीते हैं जो हर वक़्त सडको पर नंगे भूखे ,
उनको तो एक जून की रोटी ही काफी है !
जीते हैं जो हर रोज औरों के लिए,
उनका एक पल ही जीना काफी है !
जो मरता है हर पल धरा बचाने को ,
उसे खुद को एक कण ही काफी है !
सूख, उजड़ रही है मानवता यहाँ ,
इसे बचाने को एक 'चीर' ही काफी है !
नया नाता...
अनजानी.. कुछ मिचमिचाती अपनी आँखों से,
सारा जहान था दिख रहा अजनबी सा उसको,
लग रही माँ भी उसकी.. अजनबी सी उसको,
बना फिर इक नया.. माँ से पहचान का नाता,फिर भी
अकसर.. क्यूँ लगती माँ अजनबी सी,
गोद में जनम ले रहा.. नाता नया जनम के बाद,
है कैसी विडम्बना.. कैसा है.. यह नाते पर नाता,
बनने के बाद बनाना पड़ता.. फिर एक नया नाता,
है कितना अपनापन.. समाया होता इसमें भी,
हर रोज़ है आती.. एक नयी हरकत भोली मासूम,
जुड़ता हर रोज़.. एक नया अहसास भी...
है कैसी विडम्बना.. कैसा है.. यह नाते पर नाता,
बनने के बाद बनाना पड़ता.. फिर एक नया नाता...
एक नन्ही दुलारी कली
जन्म लेकर कितनी खुशियाँ लाए
कहते है साथ उसके लक्ष्मी आए
वो अपने आप में ही है हर देवी का रूप
उसे पाकर ना जाने मैने कितने आशीर्वाद पाए
तमन्ना रखती हूँ ,वो फुलो सी खिले
इस से पहले की वो अपने भंवर से मिले
उसके संग मैं अनुभव करना चाहू मेरा बचपन,वो अनमोल क्षण
जब कभी मेरी आँखें लगे भरी भरी
मेरी ही मा बन,मुझ पे ममता लूटाती सारी
वो ही मुस्कान और हिम्मत मेरी
एक नन्ही दुलारी कली
ईश्वर से मुझे तोहफे में मिली.
Wednesday, April 7, 2010
Mere Guruvar
mera data , mere ram ,mere dukh bhanjan ,mere moula , mere sache sathi , tere bin na koi aur sahara , bas le le apni sharan me baksh le muje mere har gunaho ke liye , nahi janta kya jiwan hai , nahi janta kya tera simran aur puja hai bas dil de betha hu tuje ab is dil se kabhi dur mat karna mere data
dil ek mandir
Monday, March 29, 2010
હે પરમાત્મા,
મને તારી શાંતિનું વાહન બનાવ.
જ્યાં ધિક્કાર છે ત્યાં હું પ્રેમ વાવું.
જ્યાં ઘાવ થયો છે ત્યાં ક્ષમા
જ્યાં શંકા છે ત્યાં શ્રધ્ધા
જ્યાં હતાશા છે ત્યાં આશા
જ્યાં અંધકાર છે ત્યાં પ્રકાશ
જ્યાં શોક છે ત્યાં આનંદ.
હે દિવ્ય સ્વામી, એવું કરો કે,
હું આશ્વાસન મેળવવા નહિ, આપવા ચાહુંમને
બધાં સમજે એ કરતાં હું બધાંને સમજવા ચાહું.
મને કોઈ પ્રેમ આપે એ કરતાં હું કોઈને પ્રેમ આપવા ચાહું.
કારણ કે, આપવામાં જ આપણને મળે છે;
ક્ષમા કરવામાં જ આપણે ક્ષમા પામીએ છીએ.
મૃત્ય પામવામાં જ આપણે શાશ્વત જીવનમાં જન્મીએ છીએ
હે પ્રભુ,
સંજોગો વિકટ હોય ત્યારે,સુંદર રીતે કેમ જીવવું? તે મને શીખવ
બધી બાબતો અવળી પડતી હોય ત્યારે, હાસ્ય અને આનંદ કેમ ન ગુમાવવાં? તે મને શીખવ
પરિસ્થિતિ ગુસ્સો પ્રેરે તેવી હોય ત્યારે, શાંતિ કેમ રાખવી? તે મને શીખવ.
કામ અતિશય મુશ્કેલ લાગતું હોય ત્યારે, ખંતથી તેમાં લાગ્યા કેમ રહેવું? તે મને શીખવ
કઠોર ટીકા ને નિંદાનો વરસાદ વરસે ત્યારે, તેમાંથી મારા ખપનું ગ્રહણ કેમ કરી લેવું? તે મને શીખવપ્રલોભનો,
પ્રશંસા, ખુશામતની વચ્ચે તટસ્થ કેમ રહેવું? ત મને શીખવ.
ચારે બાજુથી મુશ્કેલીઓ ઘેરી વળે,શ્રધ્ધા ડગુમગુ થઈ જાય,
નિરાશાની ગર્તામાં મન ડૂબી જાય ત્યારે, ધૈર્ય અને શાંતિથી તારી કૃપાની પ્રતીક્ષા કેમ કરવી? તે મને શીખવ.
Sunday, March 28, 2010
प्यार
प्यार तो वो जादू है, जो मिट्टी को भी सोना बना देता है। प्यार वो रिश्ता है, जो हमको हर पल चैन देता है, कभी बेचैन नहीं करता, अगर कुछ बेचैन करता है तो वो हमारा शरीर को पाने का स्वभाव। प्यार वही है, जो एक माँ और बेटे की बीच में होता है, जो एक बहन और भाई के बीच में या फिर कहूँ बुल्ले शाह और उसके मुर्शद के बीच था। ज्यादातर प्यार को हथियार बना एक दूसरे के जिस्म तक पहुँचना चाहते हैं, अगर ऐसा न हो तो दिल का टूटना किसे कहते हैं, उसने कह दिया मैं किसी और से शादी करने जा रही हूँ या जा रहा हूँ, तो इतने में दिल टूट गया। सारा प्यार एक की झटके में खत्म हो गया, क्योंकि प्यार तो किया था, लेकिन वो रूहानी नहीं था, वो तो जिस्म तक पहुँचने का एक रास्ता था, एक हथियार था। अगर वो जिस्म ही किसी और के हाथों में जाने वाला है तो प्यार किस काम का।
सच तो यह है कि प्यार तो रूहों का रिश्ता है, उसका जिस्म से कोई लेना देना ही नहीं, , प्यार कभी सुंदरता देखकर हो ही नहीं सकता, अगर होता है तो वह केवल आकर्षण है, प्यार नहीं। माँ हमेशा अपने बच्चे से प्यार करती है, वो कितना भी बदसूरत क्यों न हो, क्योंकि माँ की आँखों में वह हमेशा ही दुनिया का सबसे खूबसूरत बच्चा होता है।
प्यार तो वो जादू है, जो मिट्टी को भी सोना बना देता है। प्यार वो रिश्ता है, जो हमको हर पल चैन देता है, कभी बेचैन नहीं करता, अगर कुछ बेचैन करता है तो वो हमारा शरीर को पाने का स्वभाव। जिन्होंने प्यार के रिश्ते को जिस्मानी रिश्तों में ढाल दिया, उन्होंने असल में प्यार का असली सुख गँवा दिया।
एक वो जिन्होंने प्यार को हमेशा रूह का रिश्ता बनाकर रखा, और जिस्मानी रिश्तों में उसको ढलने नहीं दिया, उनको आज भी वो प्यार याद आता है, उसकी जिन्दगी में आ रहे बदलाव उनको आज भी निहारते हैं। उसको कई सालों बाद फिर निहारना आज भी उनको अच्छा लगता है। रूहानी प्यार कभी खत्म नहीं होता। वो हमेशा हमारे साथ कदम दर कदम चलता है। वो दूर रहकर भी हमको ऊर्जावान बनाता है।
'ये आँसू जो हैं बहते, बस इतना हैं ये कहते।
कहाँ तू और कहाँ मैं, पराया हूँ यहाँ मैं।
करम इतना अगर हो कि मुझपे इक नजर हो।'
इन पंक्तियों में प्रेम की सारी दुनिया समाई है। प्यार की बेबसी को कोई नहीं समझ सकता। जिस पर बीतती है, वह किसी से कह भी नहीं सकता, ये दिमाग की नहीं दिल की बातें हैं। कई बार होता है कि वह जिससे कहता है वही उसे झिड़कता है।
इश्क इतनी तड़प पैदा नहीं कर पाया कि आयतें उतर पाएँ। प्रेम से मिले सुख को बस हमने स्वीकार किया और उसके दुख को नकार दिया। 'इश्क नहीं आसां बस इतना समझ लीजे, इक आग का दरिया है और डूब के जाना है।'
उससे मिली नफरत, जिल्लत और तौहीन के बाद भी आपके दिल से उसके लिए तेजाब नहीं बस मुस्कराते हुए यही निकले कि 'तू सदा खुश रहे'।
लेकिन कितना अजीब है यह एहसास कि दर्द भी मीठा लगता है। जो दर्द देता है उसके लिए यही निकलता है 'जो कहोगे तुम, कहेंगे हम भी हाँ यूँ सही। आपकी गर यूँ खुशी है मेहरबां यूँ ही सही।' शायद यही प्यार है।
प्यार माँग नहीं सिर्फ देना है, अपनी तरफ से निभाना है 'उसकी वो जाने उसे पासे-वफा था कि न था,
तुम अपनी तरफ से तो निभाते जाते।'
और मैं उस पर रोज एक कविता लिखता था
लेकिन यह बात वह नही जानती थी
बहुत सालो बाद जब मैं उससे मिला
तब तक वह मेरी कविताओ कों पढ़ते पढ़ते
मेरी कविताओ का शब्द बन गयी थी
मुझे मालूम था वो मेरी आत्मा के अमृत से भर गयी थी
तब मैंने उससे कहा
मैं आपका नाम लेते हीं -एक कविता लिख लेता हूँ
संसार के सारे फूलो की सुगंध में डूब जाता हूँ
मैं खुद चांदनी सा प्रकाश बन जाता हूँ
हमसफ़र
यही ख्वाब है मेरा एक हर नजारा तुम हर नजर बनो
जहाँ हो वफ़ा हर शाम में , जहाँ ज़िन्दगी हर जाम में ,
जहाँ चाँदनी हर रात हो , उम्मीद की हर सहर बनो
मैं नहीं काबिल तेरे बना , तू फलक मैं गर्दिश भला !
तू पूनम , मैं मावस की रात ,नही बने मेरे वास्ते मगर बनो
नही मेरे लिखने में वजन कोई नही साज पर कोई गीत चढा
ना लिख सका कोई ग़ज़ल , गुनगुना सकूँ तुम वो बहर बनो
मेरी नही पतवार कोई मेरा नही माझी कोई
मैं हूँ तन्हा मंझधार में ,कश्ती को दे किनारा वो लहर बनो
दुनिया के सितमों के मारे बच्चों के चेहरे पर खुशी देखना शायद जीवन का सबसे खुशनुमा पल होता है।
दुनिया में बहुत से बच्चे ऐसे हैं, जिन्हें प्यार करना तो दूर कोई दो शब्द ठीक से भी नहीं बोलता। ऐसे बच्चों को आत्मसम्मान और खुशी दे सकें।’ जिंदगी में एक बार अनाथ और बेसहारा बच्चों को खुशी देने की कोशिश करें। इस खुशी को आप लाखों रुपए खर्च करके भी नहीं खरीद सकते।’ जरूरतमंदों की मदद करना दोस्तों के साथ पार्टी करने से ज्यादा खुशी देता है।
बुजुर्गों के साथ थोड़ा समय बिताकर उनके सुख-दुख की बात करना उनके लिए सबसे बड़ी खुशी है।’‘कभी-कभी बुजुर्ग अपने परिवार को याद कर परेशान हो जाते हैं। ऐसे में उनके साथ बैठना बहुत जरूरी हो जाता है। हम अगर किसी को खुशी देते हैं, तो इसमें हमारा कुछ नहीं जाता, लेकिन उनके चेहरे
पर आई मुस्कान जो सुकून देती है, उसे शब्दों में बयां करना मुश्किल का काम है।’
Saturday, March 27, 2010
koshish
असंभव वादे।
दूसरी श्रेणी उन लोगों की होती है जो दूसरों को तात्कालिक सांत्वना या दिलासा देने के लिए और अपना बड़प्पन दिखाने के लिए ऐसी बातें कह जाते हैं, ऐसे वादे कर जाते हैं जो पूरे करना उनके लिए तो मुश्किल हो ही जाता है जिनसे वादे किए जाते हैं वे भी बेचारे उनकी बातों में आकर चोट खाते हैं।
सांत्वना देना, मन रखना, दिलासा देना सभी अच्छा है, मगर यह अवश्य ध्यान रखें कि बड़बोलेपन की होड़ में आप ऐसे वादे, ऐसी बातें तो 'कमिट' नहीं कर रहे हैं जो आपके लिए संभव न हो। आगे जाकर उनके टूटने से सामने वाला दुखी तो होगा ही, अच्छे-खासे संबंधों में भी दरार आ जाएगी। इसलिए बढ़बोलेजी... बंद करें अपने असंभव वादे।
तुम
तुम रहे साथ मेरे, जब हर शै पराई हो गई
तुम रहे साथ मेरे, घनघोर बारिश में
तुम रहे साथ मेरे, दर्द की खलिश में
तुम रहे साथ मेरे, जख्मों पर मरहम की तरह
तुम रहे साथ मेरे, मेरे हमदम की तरह
तुम रहे साथ मेरे, एक देवदूत की तरह
तुम रहे साथ मेरे, प्रेम के वजूद की तरह...।
प्यार
कुछ लोग कहते हैं कि प्यार किया नहीं जाता, बस हो जाता है। प्यार क्या है, किससे करें, कब करें ऐसे कई अनसुलझे सवाल हैं कि अगर जानबूझकर इन्हें नजरअंदाज किया जाए तो अंत में निराशा होती है। दिल के टूटने की आहट भी सुनाई देती है।
कई बार 'जिएँगे तो साथ, मरेंगे तो साथ' ऐसे कस्मे वादे तो लोग कर लेते हैं लेकिन प्रेम के परवान चढ़ते-चढ़ते जब जिंदगी की हकीकत से सामना होता है तो सारे सपने उनके कदमों तले टूटकर बिखर जाते हैं और कुछ दिनों का इश्क जीवनभर के अश्क बन जाता है।
जब कोई किसी से सच्चा प्रेम करता है एवं केवल सामने वाले के रूप-रंग से आकर्षित नहीं होता बल्कि उसकी हर बात से पप्यार करता है। वह कभी भी यह जानने की कोशिश नहीं करता है कि वह जिसके इश्क में गिरफ्तार है, वह उसके प्रति क्या सोचता/सोचती है। वह वफादार है या नहीं। उसकी आने वाले भविष्य में क्या प्लानिंग और पॉसिबलिटीज हैं। इसी का परिणाम होता है- मोहब्बत में बेवफाई। हालाँकि सभी के साथ ऐसा नहीं होता है कि इश्क में ठोकरें ही मिलें, पर कोई जानबूझकर कुएँ में क्यों कूदे।
प्रेम को जीवन पर्यन्त सुंदर बनाए रखने के लिए भी यह जरूरी है कि हम इसके बारे में देख लें, परख लें एवं धोखा खाने से संभवतः बचने का प्रयास करें।
यूँ तो प्यार में चोट देने वाला, पहचान के बाद भी चोट दे सकता है।
अगर सामने वाला चाहता है और आपके लिए कुछ भी करने को तैयार है परंतु इस बात को अहसान बताकर याद दिलाता रहता है तो समझ लेना चाहिए कि वह आपसे प्यार नहीं करता है और आपको अपने अहसानों तले दबाकर रखना चाहता है।
यदि प्रेमी/प्रेमिका आपकी उन मामलों में भी मदद करे, जो उसकी सीमा के बाहर है तो यह मानना चाहिए कि आपको बहुत चाहता है और सदा काम करने के लिए आगे रहता है।
अगर कभी प्यार करने वाला आपका जन्मदिन ही भूल जाए या अन्य जरूरी मौकों पर सहयोग न करे और प्यार का दम भरे तो समझ लीजिए कि वह आपके बारे में कम और खुद की रक्षा करने के बारे में अधिक सोचता है।
यदि कोई लम्बे समय तक आपसे मिलता रहे, प्यार जताता रहे परंतु शादी की बात बिना किसी बड़े कारण के टालता रहे तो निश्चित ही वह आपसे शादी नहीं करना चाहता है। केवल टाइमपास बना रखा है। ऐसे में तत्काल निर्णय लेना चाहिए।
शादी से पहले ही अगर साथी का व्यवहार एवं माँगें अनुचित हों तथा तरह-तरह के प्रलोभन देकर वह केवल अपनी बात ही मनवाना चाहे तो स्वयं फैसला कीजिए कि ऐसा साथी जीवन के सफर में आप से कितनी वफा निभा सकेगा।
यदि आपको चाहने वाला आपके अलावा आपके पूरे परिवार को भी उचित मान-सम्मान देता है तथा परिवार में सदस्य की तरह ही व्यवहार करे तो मान लीजिए कि ऐसे व्यक्ति से आप शादी कर सकते हैं।
'मुहब्बत है, जरा सोच समझकर करना,
एक आँसू भी टूटा, तो सुनाई देगा।'
इसलिए प्यार में बेवफाई करने और सहने से अच्छा है कि जब प्यार हो तो प्यार को कसौटी पर परख भी लें।
मैं
और जब तुम घर के काम कर रही होती हो तो,मैं तुमसे बातें करते रहता हूँ ...
मैं तुमसे प्यार करता हूँ ...
तेरे हाथों के कौरों में मेरा भी तो हिस्सा होता है ...
तुम जब चलती हो घर में ; एक कमरे से दूसरे कमरे में जाते हुए,
मैं भी तो होता हूँ उन्हीं कदमों के साथ ..और जब तुम नींद में जाती हो ;
तो मैं भी वहाँ लेटा हुआ देखते रहता हूँ ...
और अपनी ऊँगली से तेरा और मेरा ;नाम लिखते रहता हूँ ...
और जब तुम यूँ ही अचानक हवा में मुझे ढूँढती हो;
तो मैं मुस्कराता हूँ ... फिर देखता हूँ कि ;
तुम्हारी आँखों की छोर पर एक बूँद आँसू की ठहरी हुई होती हैं;
मेरा नाम लिए हुए..तुम उसे पोंछ देती हो ;
ये देखते हुए कि किसी ने देखा तो नहीं...
मैं तब भी वहीं होता हूँ जानां!!!
प्यार
प्यार के अहसास से मीठा न कुछ है
प्यार का सौंदर्य होता है निछक्का हर रंग होता सहज-पक्का
प्यार करुणा, स्नेह, ममता है, दया है। प्यार की दुनिया बहुत होती अनूठी
