बढ़-चढ़कर बोलने वालों को लोगों द्वारा बड़बोला कहा जाता है। कुछ लोग इसलिए भी बड़बोले कहे जाते हैं कि वे अपने बारे में ढेरों खुशफहमियाँ रखते हैं और अपने गुण स्वयं गाते हुए अपने आपको दुनिया के श्रेष्ठतम लोगों में से मानते हैं।
दूसरी श्रेणी उन लोगों की होती है जो दूसरों को तात्कालिक सांत्वना या दिलासा देने के लिए और अपना बड़प्पन दिखाने के लिए ऐसी बातें कह जाते हैं, ऐसे वादे कर जाते हैं जो पूरे करना उनके लिए तो मुश्किल हो ही जाता है जिनसे वादे किए जाते हैं वे भी बेचारे उनकी बातों में आकर चोट खाते हैं।
सांत्वना देना, मन रखना, दिलासा देना सभी अच्छा है, मगर यह अवश्य ध्यान रखें कि बड़बोलेपन की होड़ में आप ऐसे वादे, ऐसी बातें तो 'कमिट' नहीं कर रहे हैं जो आपके लिए संभव न हो। आगे जाकर उनके टूटने से सामने वाला दुखी तो होगा ही, अच्छे-खासे संबंधों में भी दरार आ जाएगी। इसलिए बढ़बोलेजी... बंद करें अपने असंभव वादे।
Saturday, March 27, 2010
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