मेरे बाजुओ को तुम्हे आजमाना है
आज फिर से तुम्हे को पाना है
तेरी राह में चलते थक सा गया हु
और कहातक खुद को गिराना है
तेरी पायल की आवाज में
सनमगुम सा ये जमाना है
रूठकर तुमसे जाऊ तो कहा
खुद ही खुद से मनवाना है
मिट सा गया हु तेरे प्यार में
तेरा एक ही तो ये दीवाना है
पत्थर लेकर लोग खड़े है
फिर भी इन्हें अपनाना है
दिल तो छलनी हो गया
फिर भी यु मुस्कुराना है
मेरी आह तक नहीं सुनी लोगो ने
कहते है मौसम बड़ा सुहाना है
प्यार में तो ये चलता ही रहेगा
कुछ खोना है तो कुछ पाना है
Thursday, April 15, 2010
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