Thursday, April 22, 2010

See the faults, but do not establish them within you. After seeing the faults, immediately establish flawlessness, becoming free of concern and hence forth resolve to not indulge in sins. Thereafter if someone says you are sinful, then become joyful and tell them at one time it was so, but now I it not so. In other words, do not see the sins of the past in the present

Beholding a saint, his touch, listening to his command, and anointing your head with the dust from his lotus feet are all far fetched, but he who thinks about the saint in his mind, he becomes purified and eligible for God Realization

वे शब्द नहीं मिलते,

जिनसे अपना प्रेम व्यक्त करूँ,

माफ़ करना ख़त संभव नहीं,

झाँक कर देखो मेरी आँखों के दरिया में,

शब्दों का बहता सैलाब नज़र आएगा तुम्हें,

डूबता-ऊबता तुम्हारे प्रेम सागर में,

ढूंढ लेना जाकर मुझे,

तुम्हें मिल जाऊँगा,

वहीँ बहते धारे बीच कहीं !!

संतान है सागर के सीने की,

तैरता रहता है जीवन भर,

जी पूरा लेने पर भी ऐ शंख,

काम तेरा मन मोहना है,

आँख हों या वे श्रवण इन्द्रियाँ,

रूप ये हैं दोनों मन भीने से,

आँख से दिखती सुन्दरता है,

श्रवण तंत्र का भी प्यारा यह,

फिर चाहे सजे थाल में पूजा के,

या लगे कमल "पुष्प" से होठों पर

आओ तुम्हे प्यार करू

तुम्हारे नन्हे हातो की बासुरी से

मधुर संगीत निकाल दू ...

लोग मग्न हो जाये तुम्हे भूल जाये ..

मुझे भूल जाये ..

बस सुर ही सुर रह जाये ..

सारे आसमान पर ..

सारे भारत के जमी पर .

आओ तुम्हे प्यार करू ...

जिंदगी ने खामोश कर दिया है मुझे

अपने आप से भी

अब मै बात नाही कर पाता हु.

सिकुड कर राख दिया है हालत ने

अपना प्रतिबिम्ब भी देखने को डर लगता है

जिंदगी की सारी परिभाषा भुल सा गया हु

नन्हासा ..कोमल है दिल मेरा

कितने आघात सहेगा ..

मेरी पहचान ही भुल सा गया हु

अब आइना भी मेरी शक्ल होने का

इंकार करता है ..

पर फिर भी सुकून है इस बात का

के तेरे रूह में ..

मेरे पहचान की ..

एक लौ सी जल रही है

काफी है मेरी सुकून के लिए ...

कई भावनाओ का रस

मेरे रक्त के हर बूंद बूंद में छटपटाता है

मेरा मन सागर की लहरों की तरह उछलता है

आकाश की ऊंचाई और सागर की

गहराई से होकर गुजरता हूँ मै

साँसे है के थम ने का नाम नहीं लेती

आसमानी खुशबु से सुगन्धित हो जाता हु मै

बारिश की बूंदों से वर्षित हो जाता हु मै

दिल दिमाग तहस नहस ओ जाता है

और कागज लेकर

मुझपे गुजरने वाली हर दास्ता को

शब्दबद्ध करने की कोशिश करता हु..

तुम ...

शबनम की तरह
तुम जो हलके से
उतर आती थी
मेरे बदन पर हर
सुबहमेरे दिल की नमी के लिए...
वो काफी होता था ..
मेरे दिनभर के लिए ..
चांदनी की तरह उतर आती थी तुम
मेरे तन बदन पर हर शाम ..
वो काफी होता था मेरे रात भर के लिए ..
तेरी खुशबु ..तेरी बाते ..
तेरी मुस्कराहट . ..तेरी बाहे..
काफी होता थामेरे जिंदगी भर के लिए ..
अब तेरे साये से भी हटने को दिल नहीं करता ..
खुदा से दुआ मांगता हु के .
तेरे हातो की हिना में मुझे सजाये रख
वो काफी होगा मेरे आखरी सांस के लिये ..

जब तुम आसमान के लिए

भरों उड़ान

और तेज आंधियाँ रोके तुम्हारी राहमैं

प्रार्थना के रूप में हूँ साथ

सितारों की चमक जब बस जाए

तुम्हारी आँखों में

तब पलके मूँदकर

एक बारमुझे करना याद।

प्रेम वह मधुर अहसास है जो जीवन में मिठास घोल देता है

विशुद्ध प्रेम वही है जो प्रतिदान में कुछ पाने की लालसा नहीं रखता। आत्मा की गहराई तक विद्यमान आसक्ति ही सच्चे प्यार का प्रमाण है।

सच्चे प्यार का अहसास किया जा सकता। इसे शब्दों में अभिव्यक्त करना न केवल मुश्किल है बल्कि असंभव भी है। सच्चे प्यार में गहराई इतनी होती है कि चोट लगे एक को, तो दर्द दूसरे को होता है, एक के चेहरे की उदासी से दूसरे की आँखें छलछला आती हैं। सच्चे प्रेम का 'पुष्प' कोमल भावनाओं की भूमि पर आपसी विश्वास और मन की पवित्रता के संरक्षण में ही खिलता और महकता है।

जब तुम्हारे दिल में मेरे लिए प्यार उमड़ आये,

और वो तुम्हारी आँखो से छलक सा जाए.......

मुझसे अपनी दिल के बातें सुनने कोयह दिल तुम्हारा मचल सा जाए..........

तब एक आवाज़ दे कर मुझको बुलानादिया है जो प्यार का वचन सजन,

तुम अपनी इस प्रीत को निभाना ............

तन्हा रातों में जब सनमनींद तुम्हारी उड़ सी जाये.......

सुबह की लाली में भी मेरे सजन,

तुमको बस अक़्स मेरा ही नज़र आये......

चलती ठंडी हवा के झोंके ....

जब मेरी ख़ुश्बू तुम तक पहुंचाए .

तब तुम अपना यह रूप सलोना ....

आ के मुझे एक बार दिखा जानादिया है जो प्यार का वचन साजनतुम अपनी इस प्रीत को निभा जाना

Saturday, April 17, 2010

जन्नत

ऐ खुदा
मै तो तेरा ही था
तुने ही तो मुझे जिंदगी की सुबह दी थी
तेरे रस्ते पर चलना
काटो का ताज था ..
गिर गया मै ,
फिर संभला फिर खड़ा हुवा ..
कभी टुटा , कभी समेटा
इस दिल को कितने बार कांच की तरह संभाला..
तेरी दि हुवी पाक रूह को
पाक ही रखने की कोशिश की
हजारो कोशिश के बाद
आज इस मुकाम पर हु
तेरे दीदार का प्यासा हु
तेरे पास आना चाहता हु ..

ऐ खुदा ..
नहीं चाहिए जन्नत मुझे
ना ही चाहिए जहन्नुम ..
बस यही इल्ताजा है
वैसा हि ले ले अपने पास मेरी
मुझे जैसे मां के पेट मे
मै था एक रक्त कि बूंद ...

जनम से लेकर मरण तकका
सफ़र न पुछ मुझे
और न पुछ कोई हिसाब और किताब
मै बताने लायक नहीं हु... !

Thursday, April 15, 2010

प्यार

मेरे बाजुओ को तुम्हे आजमाना है
आज फिर से तुम्हे को पाना है
तेरी राह में चलते थक सा गया हु
और कहातक खुद को गिराना है
तेरी पायल की आवाज में
सनमगुम सा ये जमाना है
रूठकर तुमसे जाऊ तो कहा
खुद ही खुद से मनवाना है
मिट सा गया हु तेरे प्यार में
तेरा एक ही तो ये दीवाना है
पत्थर लेकर लोग खड़े है
फिर भी इन्हें अपनाना है
दिल तो छलनी हो गया
फिर भी यु मुस्कुराना है
मेरी आह तक नहीं सुनी लोगो ने
कहते है मौसम बड़ा सुहाना है
प्यार में तो ये चलता ही रहेगा
कुछ खोना है तो कुछ पाना है

You are my air

The sun in my day

The moon in my night

The spring in my step

You are my everything.

You are the stars in the sky

The birds in the trees

The shimmer, the sparkle, the shine.

Without the light you put into my life

I would be nothing

A single leaf on the ground in autumn,

Lost, forgotten, alone.

Before i knew you,

I was nothing.

Now I am everything,

With you at my side,

I am invincible!

Feel the same my baby,

You are loved so much,

I love you now and forever

You are my darling, my baby, my love

You are my everything

I love you so much.

Wednesday, April 14, 2010

पल...

कुछ पल हमें साथ देते है
कुछ हमें रुखसत करते है
कुछ पल दिल के कोने कोने को
महका देते है ..
कुछ तो इतने हलके होते है
के हम आसमा की ऊंचाई पाते है
कुछ इतने गहरे होते हैके जीवन
के सागर डूब जाते है..
कुछ पल दिलदार होते है
दोस्ती कर लेते हैकुछ पल दुश्मनी निभा देते है
कुछ पलो को हम पकड़ लेते है
तो कुछ पल फिसल जाते है ..
कुछ पल तन्हाई के
कुछ पल भीडभाड केकुछ पल मनाने के
कुछ होते है रुसवाई के

ऐ खुदा

ये क्या माजरा है
इंसान को क्या चाहिए ?
सिर्फ दो चार सुख के पल ही दे दे ..
माँ-बाप अपने बच्चे के लिए जमाने भर के खिलौने खरीदते हैं जो कभी न कभी टूट जाते हैं लेकिन अपने बच्चे को छोटा भाई या बहन देकर वह उसे ऐसा जीता जागता खिलौना देते हैं जो उनके दुनिया से जाने के बाद भी बच्चे को अकेलेपन का अहसास नहीं होने देता।

जिस भाई या बहन से हम बचपन में लड़ते झगड़ते हैं और खेलते हैं उसके बारे में शायद ही कभी गहराई से यह सोचा जाता हो कि वह माँ- बाप की कितनी खूबसूरत देन है।

माँ-बाप तो हमेशा दुनिया में नहीं बैठे रहेंगे। तो उनके जाने के बाद कोई तो ऐसा हो जिससे इंसान जिंदगी में अपना सुख-दुख बाँट सके और इसके लिए भाई या बहन से बेहतर रिश्ता कोई नहीं हो सकता है।

भाई या बहन के साथ बचपन गुजारने वाले बच्चे अधिक आत्मविश्वासी कुशाग्र बुद्धि तथा सामंजस्य बिठाने वाले होते हैं।

आज एक तो कामकाजी माता-पिता के पास बच्चों के लिए वैसे ही समय नहीं है और उस पर यदि बच्चा घर में भी अकेला है तो वह किससे अपनी भावनाएँ व्यक्त करे किसके साथ खेले।

भले ही माँ- बाप कितना भी क्वालिटी समय बच्चे के साथ गुजारें लेकिन वह बच्चे के हमउम्र नहीं बन सकते। जो साथ बच्चे को अपने भाई बहन के साथ मिलता है उसकी किसी भी खिलौने से भरपाई नहीं की जा सकती।

सगे भाई बहनों में आपसी प्रतिद्वंद्विता भी होती है लेकिन यह स्वाभाविक है और समय के साथ यह अपने आप समाप्त हो जाती है। लेकिन भाई या बहन का रिश्ता शायद माँ-बाप के रिश्ते के बाद दुनिया का सबसे खूबसूरत रिश्ता होता है।

वे बच्चे बेहद खुशनसीब हैं जिनके भाई या बहन हैं क्योंकि माँ या बाप के बाद कोई भी बच्चा खुद को सबसे अधिक सुरक्षित अपने भाई या बहन की संगत में ही महसूस करता है।

दास्ताँ भाई-बहन के प्यार की।

अतीत के गलियारों में से अक्सर आवाजें आती हैं बचपन की शरारतों की। हमारी स्मृति में धुँधली सी पर यादगार तस्वीरें होती हैं अपने बचपन की।

भाई-बहन की उन शरारतों की, जिसे याद करते ही चेहरे पर मुस्कुराहट आ जाती है और खुल जाती है दास्ताँ भाई-बहन के प्यार की।

भाई-बहन का नाता प्रेम व स्नेह का होता है। इस रिश्ते में हमारा बचपन कैद होता है, जिसे हमने बे‍फिक्र होकर पूरे आनंद से जिया है। हालाँकि आज हम रिश्तों के कई पायदानों पर चढ़ गए हैं परंतु हम अपना सुनहरा बचपन नहीं भूले हैं।

आधुनिकता की आँधी की मार झेलकर भी यह रिश्ता आज भी उतना ही पाक़ है। आज भी भाई-बहन में उतनी आत्मीयता और अपनापन है कि एक का दर्द दूसरे को महसूस होता है। दोनों एक-दूसरे के दु:ख-दर्द व खुशियों में शरीक होकर उन्हें सहारा देते हैं

यह ‍रिश्ता आत्मीयता का रिश्ता होता है जिसे दिल से जिया जाता है। बचपन तो भाई-बहन की नोक-झोंक व शरारतों में गुजर जाता है।

भाई-बहन के रिश्ते की अहमियत तो हमें तब पता लगती है जब हम युवा होते हैं। जब हमारे बच्चे होते हैं। उनकी शरारतें हमें फिर से अपने बचपन में ले जाती हैं।

हर रक्षाबंधन पर बहन, भाई का बेसब्री से इंतजार करती है और भाई भी मीलों के फासले तय करके अपनी बहन को लेने जाता है। यही नहीं हर त्योहार पर बधाइयाँ देकर एक-दूजे के सुखी जीवन की कामना करते हैं।

माँ-बाप की डॉट-फटकार से अपने प्यारे भाई को बचाना हो या चुपके-चुपके बहन को कहीं घुमाने ले जाना हो... यह सब भाई-बहन को बखूबी आता है।

बचपन में हमने भी बहुत सारे बहाने किए, माँ-बाप की डॉट भी खाई पर वही किया जो हमें पसंद था। हमारी उन शरारतों में भी एक प्यार छुपा था, जिसकी तलाश आज भी हम करते हैं।

आधुनिकता की आँधी की मार झेलकर भी यह रिश्ता आज भी उतना ही पाक़ है। आज भी भाई-बहन में उतनी आत्मीयता और अपनापन है कि एक का दर्द दूसरे को महसूस होता है। दोनों एक-दूसरे के दु:ख-दर्द व खुशियों में शरीक होकर उन्हें सहारा देते हैं और ऐसा होना भी चाहिए।

यह प्यार ताउम्र बना रहे और भाई-बहन एक-दूसरे का साथ जीवनभर निभाएँ। ऐसी ही आशा है। रिश्ते की इस डोर को प्यार व समझदारी से थामें रखें ताकि रिश्तों में मधुरता सदैव बरकरार रहे।

मेरी बहेना

यूँ तो दुनिया में कई सारे रिश्ते हैं, मगर इन सब रिश्तों में सबसे प्यारा और पवित्र रिश्ता है भाई-बहन का। अगर भाई अपनी बहन की आँख में एक आँसू नहीं देख सकता तो बहन भी अपने भाई के लिए कुछ भी करने को हर पल तैयार रहती है। जहाँ ये रिश्ता चाँद की चाँदनी के समान शीतलता प्रदान करता है वहीं यह सागर की गहराइयों के समान गंभीरता भी रखता है।भाई-बहन एक-दूसरे के सबसे अच्छे दोस्त होते हैं।उनके बीच कभी कोई बात छिपती नहीं, वे एक-दूसरे की मन की बात बिना कहे ही जान लेते हैं। वे उसी तरह एक-दूसरे की चिंता करते हैं और एक-दूसरे का ध्यान रखते हैं। भाई-बहन के रिश्ते में कभी स्वार्थ नहीं होता, होती हैं तो बस निःस्वार्थ भावना एक-दूसरे के लिए बेहतर से बेहतर करने की इस रिश्ते में एक-दूसरे के लिए प्रेम, सम्मान, आत्मीयता, त्याग सब कुछ देखने को मिलता है।

बहन अगर खुशियों का खजाना होती है तो भाई उस खजाने की चाबी। सच कहें तो भाई के जीवन में रौनक ही बहन से होती है। वो बहन ही होती है जिसको तोहफा देने के लिए कभी वो पॉकेटमनी के पैसे इकट्ठा करता है तो कभी छोटी-सी बात पर किसी से भी लड़ पड़ता है। और वही बहन उसकी जिंदगी होती है जो उसे छेड़ती है, लडाई BHI भी कर लेती है, लेकिन उसी से सबसे ज्यादा प्यार भी करती है।एक भाई से अच्छा सलाहकार बहन के लिए कोई हो नहीं सकता।

बहन अपनी कोई गलती भाई से छिपा नहीं सकती। बता ही देती है और भाई भी उससे कुछ दुराव-छिपाव नहीं रखता। वह हमेशा उसकी मदद को तत्पर रहता है। बहन को दर्द होने पर वह आँख भाई की ही होती है जिसमें सबसे पहला आँसू भर आता है। बहन कभी कहती नहीं मगर महसूस करती है कि उसके लिए जान तक पर खेल जाने वाला उसका भाई उससे बेइंतहा प्यार करता है। और यही उनके रिश्ते की शक्ति होती है।

सचुमुच बड़ा अनोखा होता है भाई बहन का प्यार अनमोल रतन होता हे कोहिनूर से ज्यादा कीमती होता है । इश्वर की और गुरु देव की जिसके उपर इनायत होती है उसे मिलती है मासूम गुडिया सी बहेना .आँखों का नूर और दिल का सुरुर होती है प्यारी बहना । मेरी प्यारी बहेना को बहोत सारे प्यार की साथ समर्पित है यह छोटा सा प्यार भरा पैगाम और याद

प्रेम

प्रेम एक मीठा रस है, मिठाई ki तरह,परन्तु आसानी से नहीं मिलता, क्युकी प्यार सबसे कीमती हैजैसे-जैसे प्रेम बड़ेंगा, वैसे-वैसे तड़प बढेंगी,जैसे-जैसे तड़प बढेंगी, वैसे-वैसे पुकार बढेंगी,जैसे-जैसे पुकार बढेंगी वैसे-वैसे कदम भी बढेंगे, जितनी जोर से प्यास लगती हैउतने ही जोर से कदम बढने लगते है जल के स्त्रोत की और और जब जब प्रभु की प्यास लगेंगी तो टिक नहीं पओंगे, आसू बहाओंगे, चिल्लाओंगे...

सच्चे प्रेम की हमारे जीवन में बहोत ही आवश्यकता हैवो प्रभु से कहते है न के "हे प्रभु हम तो तेरे चरणों की धुल है"ये सब कहने की बाते है, धुल है या नहीं ये हम अन्दर से अच्छी तरह से जानते है, कहने की जरुरत ही नहीं है, और प्रभु भी जानता है की हम क्या हैझूठे प्रेम, दिखावे का प्रेम तो चल नहीं सकता,खोटा सिक्का नहीं चलेंगा, चलेंगा तो सच्चा प्रेम चलेंगा,कब तक दिखावा करेंगे, जीवन भर तो दिखावा करते रहते है, जीवन ही उलट फेर, हेर फेर हैकिसी को कुछ बोला, किसी को कुछ बोला,अभी कुछ तो कभी कुछ,आप जो हो वो हो, बदलते रहते है हम हर पल,किसी के सामने कुछ, किसी के सामने कुछ....

Tuesday, April 13, 2010

जिंदगी ..

क्यों होता है ये ..

आंसू छलक आते है

न जाने क्यों ..

ऐसे ही आखो में तैरने लगते है ..

मुझे किसी ने कहा था

कभी जीवन में आंसू न निकालना

जीते रहना ..लढते रहना

जबतक लक्ष्य को नही पाये

तबतक जिंदगी से न हारना

मै भी बड़ा कठोर बन गया

ह्रदय को विशाल की जगह मजबूत कर दिया

हजारो भावनाओ को क़त्ल कर दिया

जिंदगी को कई जगह हरा दिया

इतना कठोर हो गया
के आखे पत्थर सी हो गयी..

पर न जाने क्यों
ऐसा क्यों होता है ...

आजकल एक हवा का झोका भी मुझे रुला देता है ..

ऐ खुदा..

जीवन से लेकर मरण तक

हजारो सुख दुःख के पल जीते जीते

न जाने आदमी कितनी मंजिले पार करता है

सर उठा के जीने के लिए

कितनी बार मन को

गिरवी रखता है..

उधार का सुख . ,

मज़बूरी का दुःख..

माँ के गोदी से निकल कर

इस ज़माने में तीथर बिथर हो जाता है..

रोटी , कपडा और मकान के चक्कर में

आम आदमी आम ही रह जाता है..

मान.. अपमान..कितने बार उठेगा ..

कितने बार गिरेगा..

हक की आवाज दबाई जाती हैचिल्लाओ तो लोग दीवाना कहते है

रूठो तो लोग बावरा कहते है..

अकेला कबतक लढु मै ज़माने से..

ऐ खुदा ..एक हि दुवा है तुझसे

या तो कोई दिशा दे दे मुझको

या मुझे दिशाहीन कर दे ..

दोस्ती

कभी कभी लगता है

कभी कभी लगता है

बल्कि उसकी आत्मा को चूम लू..

आत्माए मिलने पर ही तो दोस्ती बन जाती है..

रूह की रूह को खबर होती है

दोस्ती तो आसमानी होती है..

कभी बदली सी छा जाती है तो कभी ये नूरानी होती है..

मेरे यार तुझको सलाम ..

मेरे आखरी सांस तक

मेरी आंखो मे विश्वास बन के रहना

मेरे जीवन मे मेरा श्वास बनके रहना

Monday, April 12, 2010

फिर तुम क्यों नाराज़ खुदी सेएक सरल मुसकान बिखेरो ,

जगती के सुंदर जीवन सेसुंदर नयनों को न फेरो.

ये संसार देव नगर है ,जिसमें मिलती कई डगर हैं .

रुके -खड़े क्यों !क्या उलझन है !

अपने कदम बढ़ा कर देखो,

साथ चलेंगे कितने पग फिरएक बार अपनाकर देखो

जीवन में कैसी देरी है ,

जीवन में कैसी जल्दी है ,

जीवन में क्या खो जाना है ,

जीवन में क्या मिल जाना है ,

मेरी आँखों से तुम देखो जग जाना और पहचाना है.

नहीं अकेले इस सागर मेंलहर-लहर का मिल जाना है.

मेरे शब्द उठा कर देखोशब्द गीत हर हो जाना है.

सागर अपने मन -दर्पण मेंचाँद समेटे रख सकता है ,

और हवाओं का ये आँचलसुमन झोली में भर सकता है ,

माँग लो आज मुझको मुझी से तुम,

फिर न कहना कि मौका न मिला,

लगा है मेरा आज सर्वस्व दांव पर,

लूट मची है तुम भी भर लो दामन,

प्रेम बचा है अंतर में.. है भरा ठूँस-2,

यूँ भी है अधिकार तुम्हारा मुझ पर,

लगे हैं मेले चारों तरफ लूटखोरों के,

फिर क्यों पीछे तू भी रहे आ लूट मुझे,

जी रहा हूँ जीवन तेरी आशा से रहित,

नहीं है तू.. अब लग रही बोलियाँ हैं,

मन बैठा सोच रहा कौन घडी थी वह,

मैंने जब तुझसे लगाया अपना दिल,

"तीस बरस" बाकी जीवन के तेरे बिन,

बिन तेरे अब उनको जी पाउँगा कैसे,

एक पहर भी अब जी पाना मुश्किल है,

अरसा है लम्बा अब जी पाउँगा कैसे,

माँग लो आज मुझको मुझी से तुम,

फिर न कहना कि मौका न मिला,

लगा है मेरा आज सर्वस्व दांव पर !!

Sunday, April 11, 2010

Mere Guruvar

sab se pyare nam , subse dulara nam , man bhavan aur man mohak nam , tera hi nam , jis ne visaru kabhi , jise japta rahu har dam , jise na bhulu me kabhi bhulu bhale apne aap ko bas na bhulu teri mahima , tere gungan , tera didhar , tera dharsh aur teri karuna kripa , vo hi to hai sahara , vohi to hi mera kinara , vohi sacha sathi , mera mit aur mera hamdam , har pal har xhan bas apne nam ma dan dena , apne simran ka dan dena , apne didar ka diyan dena mere Guruvar

mera data , mere ram ,mere dukh bhanjan ,mere moula , mere sache sathi , tere bin na koi aur sahara , bas le le apni sharan me baksh le muje mere har gunaho ke liye , nahi janta kya jiwan hai , nahi janta kya tera simran aur puja hai bas dil de betha hu tuje ab is dil se kabhi dur mat karna mere data

उम्र भी जी लो...

बरसते हुए बादल, शायद ही कभी गरजते,

बयां कर जाते बहुत कुछ, मगर कभी कुछ ना कहते.

तुम्हारी हर छोटी छोटी बात, और हर एक बात मुझे बहुत ही भाती है,

ऐसा कोई पल नहीं, जिसमे तुम्हारी याद नहीं आती है.

इतने शांत होकर भी इतने नटखट हो,

कभी एकदम बुज़ुर्ग तो कभी बच्चे हो,

लगते बहुत अच्छे हो, मगर एक ही शिकायत है,

कभी अपनी उम्र भी जी लो...

बन्नो हमारी

लाडो हमारी है चाँदतारा,

वो चाँदतारा वर माँगती है

बन्नो हमारी है चाँदतारा,

वो चाँदतारा वर माँगती है॥

ढोलक की थाप और घर में गूँजते ये विवाह के गीत सुन मन मयूर नाच उठता है। बेटी के ब्याह की सोच-सोच ही ऐसा लगने लगता है, मानो सारे जहाँ की खुशियाँ हाथ लग गई हों, सारे सपने पूरे हो गए हों। सच ही तो है! बेटी के जन्म के साथ उसको स्पर्श करते ही न जाने कितने रंग-बिरंगे खुशियों की सौगात से परिपूर्ण सपने आँखों में तैरने लगते हैं।

ज्यों-ज्यों वो बड़ी होती जाती है, त्यों-त्यों ख्वाब के साकार होने की इच्छा भी माता-पिता की बलवती होने लगती है और वे तन-मन धन से उन्हें पूरा करने में लग जाते हैं।

यही फिर उनके जीवन का एकमात्र उद्देश्य रह जाता है कि बेटी को सिर्फ और सिर्फ सुखी संसार ही मिले। कैसी भी परेशानी अथवा दुःख की घड़ी सदा-सदा कोसों दूर रहे।

सुख-दुख

कुछ ऐसा लिखो जिससे खुशी के वक्त पढ़ें तो गम याद आ जाए और गम के वक्त पढ़ें तो खुशी के पल याद आएँ। बीरबल ने कुछ देर सोचा, फिर कागज पर यह वाक्य लिखकर बादशाह को दिया- यह वक्त गुजर जाएगा। सच! इन चार शब्दों के वाक्य में जीवन की कितनी बड़ी सच्चाई छुपी है।

सभी जानते हैं कि सुख-दुख जीवन के दो पहलू हैं जिनका क्रमानुसार आना-जाना लगा ही रहता है। किंतु हम सब कुछ जानते-समझते हुए भी दोनों ही वक्त अपनी भावनाओं-संवेदनाओं पर नियंत्रण नहीं रख पाते। जब खुशियों के पल हमारी झोली में होते हैं तो उस समय हम स्वयं में ही इतने मग्न हो जाते हैं कि क्या अच्छा क्या बुरा, इस पर कभी विचार नहीं करते हैं।

अपनी किस्मत व भाग्य पर इठलाते हुए अन्य की तुलना में श्रेष्ठ समझते हैं और अहंकारवश कुछ ऐसे कार्य तक कर देते हैं जिनसे स्वयं का हित और दूसरे का अहित हो सकता है। इस क्षणिक सुख को स्थायी मानते हुए ही जीने लगते हैं और वास्तव में यही सोच अपना लेते हैं कि अब हमें क्या चाहिए, सब कुछ तो मिल गया। बस! एक इसी भ्रांति के कारण स्वयं को उतने योग्य व सफल साबित नहीं कर पाते जितना कि कर सकते थे।

इसी तरह दुःखद घड़ी में भी अपना आपा खो बेसुध होकर सब भूल जाते हैं। छोटे-से छोटे दुःख तक में धैर्य-संयम नहीं रख पाते। बुद्धि-विवेक व आत्मबल होने के बावजूद स्वयं को इतना दयनीय, असहाय व बेचारा महसूस करते हैं कि आत्मसम्मान, स्वाभिमान तक से समझौता कर लेते हैं। यही कारण है कि सब कुछ होते हुए भी उम्रभर अयोग्य-असफल होने लगते हैं।

कहने का सार यह है कि जो भी छोटी-सी जिंदगी हमें मिली है उसमें सुख व दुख दोनों ही से हमारा वास्ता होगा, यही शाश्वत सत्य है। इस सच को हम जितनी जल्दी स्वीकार कर लेंगे उतना ही हमारे लिए अच्छा रहेगा, क्योंकि फिर ऐसा समय आने पर हम अपने संवेगों पर काबू कर उन्हें स्थिर रख सकेंगे।
जीवन में किसी सौभाग्य से कम नहीं,

माँ का होना..... जिसका ममता भरा हृदय,

जान लेता है वो सब कुछ ...जो रह जाता है अक्सर अनकहा
आपसे जुड़े ज्यादातर रिश्ते ऐसे होते हैं जिनको आप किसी न किसी नाम से पुकारते हैं। उन रिश्तों के बारे में सोचने की आपको जरूरत ही नहीं पड़ती है। उनके प्रति आपका फर्ज एवं अधिकार मानो जन्म से ही समझा दिया गया होता है इसीलिए बिना किसी विचार-विमर्श के सहजता से आप उसे निभाते चले जाते हैं।

कुछ ऐसे होते हैं जो आपका दुख-दर्द सुन तो लेते हैं पर उससे ज्यादा वे और कुछ नहीं करते। जिनसे आपकी महीनों बात नहीं होती पर मुसीबत में आप उन्हें फोन करते हैं और आपकी बातों और आवाज से उन्हें लगता है कि आपको उनकी हमदर्दी की जरूरत है। वह आपसे परेशानी पूछते हैं, आपको दिलासा देते हैं और उनसे कुछ बन पड़ता है तो वे आपके लिए करते भी हैं।

पर, कई बार आप एक विचित्र से रिश्ते में पड़ जाते हैं। न तो उसका कोई नाम होता है और न ही आपको यह पता होता है कि आपका उस व्यक्ति पर कितना अधिकार है। इतना ही नहीं, आपका उस व्यक्ति के प्रति क्या कर्तव्य होना चाहिए यह भी आप नहीं समझ पाते हैं। कभी आप उससे हफ्तों नहीं मिलते और जब मिलते हैं तो खूब अधिकार से झगड़ा करते हैं। आपकी यही ख्वाहिश होती है कि आपको वह मनाए, आपकी सारी शिकायतों पर माफी माँगे, कान पकड़े और सारी गलतियों को सर आँखों पर ले। आपको दिल व जान से प्यारा होता है।

एक पल ही जीना

शुष्क धरती की प्यास बुझाने को ,
पानी की एक बूंद ही काफी है !
किसी की जिंदगी बसाने को ,
प्यार भरी एक साँस ही काफी है !
जीवन के मोती बनाती है सीप बहुत ,
उसे पानी की एक बूंद ही काफी है !
जीते हैं जो हर वक़्त सडको पर नंगे भूखे ,
उनको तो एक जून की रोटी ही काफी है !
जीते हैं जो हर रोज औरों के लिए,
उनका एक पल ही जीना काफी है !
जो मरता है हर पल धरा बचाने को ,
उसे खुद को एक कण ही काफी है !
सूख, उजड़ रही है मानवता यहाँ ,
इसे बचाने को एक 'चीर' ही काफी है !

नया नाता...

निकल कर देखा.. अपनी माँ के उदर से उसने,
अनजानी.. कुछ मिचमिचाती अपनी आँखों से,
सारा जहान था दिख रहा अजनबी सा उसको,
लग रही माँ भी उसकी.. अजनबी सी उसको,
बना फिर इक नया.. माँ से पहचान का नाता,फिर भी
अकसर.. क्यूँ लगती माँ अजनबी सी,
गोद में जनम ले रहा.. नाता नया जनम के बाद,
है कैसी विडम्बना.. कैसा है.. यह नाते पर नाता,
बनने के बाद बनाना पड़ता.. फिर एक नया नाता,
है कितना अपनापन.. समाया होता इसमें भी,
हर रोज़ है आती.. एक नयी हरकत भोली मासूम,
जुड़ता हर रोज़.. एक नया अहसास भी...
है कैसी विडम्बना.. कैसा है.. यह नाते पर नाता,
बनने के बाद बनाना पड़ता.. फिर एक नया नाता...
नन्ही कली

एक नन्ही दुलारी कली

जन्म लेकर कितनी खुशियाँ लाए

कहते है साथ उसके लक्ष्मी आए

वो अपने आप में ही है हर देवी का रूप

उसे पाकर ना जाने मैने कितने आशीर्वाद पाए

तमन्ना रखती हूँ ,वो फुलो सी खिले

इस से पहले की वो अपने भंवर से मिले

उसके संग मैं अनुभव करना चाहू मेरा बचपन,वो अनमोल क्षण

जब कभी मेरी आँखें लगे भरी भरी

मेरी ही मा बन,मुझ पे ममता लूटाती सारी

वो ही मुस्कान और हिम्मत मेरी

एक नन्ही दुलारी कली

ईश्वर से मुझे तोहफे में मिली.

Wednesday, April 7, 2010

Mere Guruvar

sab se pyar nam , subse dulara nam , man bhavan aur man mohak nam , tera hi nam , jis ne visaru kabhi , jise japta rahu har dam , jise na bhulu me kabhi bhulu bhale apne aap ko bas na bhulu teri mahima , tere gungan , tera didhar , tera dharsh aur teri karuna kripa , vo hi to hai sahara , vohi to hi mera kinara , vohi sacha sathi , mera mit aur mera hamdam , har pal har xhan bas apne nam ma dan dena , apne simran ka dan dena , apne didar ka diyan dena mere Guruvar

mera data , mere ram ,mere dukh bhanjan ,mere moula , mere sache sathi , tere bin na koi aur sahara , bas le le apni sharan me baksh le muje mere har gunaho ke liye , nahi janta kya jiwan hai , nahi janta kya tera simran aur puja hai bas dil de betha hu tuje ab is dil se kabhi dur mat karna mere data

dil ek mandir

bas dil ko to mandir banana hai aur usme murat sajani hai apne pratam ki voh pritam jo kabhi juda nahi hota , kabhi nahi bichadta , kabhi hamse alag nahi hota , bhichadta hai yah sansar , bhichadti hai yah sansari vastue jo kabhi hamari nahi thi par galti se ham apni samaj bethate hai , jinke liye mare mare firte hai , rat din rote rahate hai voh sab to bichad jayega par jo kabhi nahi bhichdega , kabhi hamese juda nahi hoga use kab ham prit karenge , kab dil me mandir me use sajayenge ,kab tak bahar gumte rahenge , kyo nahi ham dil ke mandir me dubate ,kyo hamari mati mari gayi hai , kab tak sansare ke bandanome dubate rahenge , kab tak sabko kush karte phirte rahenege , kayo nahi ham apne atma deva ko kush karte , kyo nahi ham unke liye apni prit ki dori ko kaste , kab tak ............................................................................................... samay ka panchi udta ja raha hai , har din chutta ja raha hai , bas kahi der na ho jaye