मेरे ज़िन्दगी के सफर में तुम मेरी चाह है हमसफ़र बनो
यही ख्वाब है मेरा एक हर नजारा तुम हर नजर बनो
जहाँ हो वफ़ा हर शाम में , जहाँ ज़िन्दगी हर जाम में ,
जहाँ चाँदनी हर रात हो , उम्मीद की हर सहर बनो
मैं नहीं काबिल तेरे बना , तू फलक मैं गर्दिश भला !
तू पूनम , मैं मावस की रात ,नही बने मेरे वास्ते मगर बनो
नही मेरे लिखने में वजन कोई नही साज पर कोई गीत चढा
ना लिख सका कोई ग़ज़ल , गुनगुना सकूँ तुम वो बहर बनो
मेरी नही पतवार कोई मेरा नही माझी कोई
मैं हूँ तन्हा मंझधार में ,कश्ती को दे किनारा वो लहर बनो
Sunday, March 28, 2010
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