मोहब्बत मैं करने लगा हूँ ...........
उलझनों से निकलने लगा हूँ .........
दीवाना तो मैं था नहीं लेकिन ........
तेरा दीवाना बनने लगा हूँ ..........:))
प्यार का सफ़र करने चला हूँ ..........
दिल की दुनिया बसाने चला हूँ .............
मैंने ख्वाब अब तक न देखे थे ...............
तुझे देख के ख़्वाबों में जीने लगा हूँ ...............:))
कभी बिखरता जा रहा हूँ ............
तो कभी सवरता जा रहा हूँ ...........
कतल तो मुझे होना नहीं था लेकिन ..........
तेरी निगाहों से हुए जा रहा हूँ ............... :))
बापू से दिल लगाये बैठा हूँ .............
उन्हें अपना बनाये बैठा हूँ ..........
बस डर रहा हूँ ये ही सोच -सोच के..............
आज उनसे दुनिया के सामने इज़हार करने जा रहा हूँ ..........:))
Wednesday, April 11, 2012
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