जब याद तुम्हारी आती है....
मेरा जी भर-भर आता है.........
मै पल-पल तुम्हे बुलाती हू, .............
तुम आते हो........ मुसकाते हो ...............
मुसकाके फिर छिप जाते हो.................
क्या ये ही तुम्हे सुहाता है, ...................
जब याद तुम्हारी आती है.................
प्रीय कैसी ये निष्ठुरता है।
हाय कैसी ये बेदर्दी है.................
या ये क्रन्दन भी झुठा है,
जो तुम तक पहूच ना पाता है।................
हे! प्रियतम प्राण आधार हरे हे!.............
मेरे सोणे साजन हरे............
ऐक बार तो आके अपना लो.............
अब तुम बिन रहा न जाता है, ...............बापू
न कोइ अपना हे जग मे , न कोई पराया लगता ह.............
इस दासी का तो बस केवल एक जोगी तुम्ही से नाता है !!
आप क्या जानो ऐ! मेरे बापू पिया कैसे तूम बिन जिये जा रहे है ......
"आपकी बेवफाई के सदके , लोग ताने दिये जा रहे है,
जितना जी चाहे तडपा लो हमको, तेरी पुजा किये जा रहे है".......
किन गुनाहो कि है ये सजाये , बापू जी हमे कुछ बताये,
टुकडे टुकडे किया दिल है मेरा, प्यार तुमसे किये जा रहे है......
तेरे मिलने कि उम्मीद लेकर , गम के आशु पिये जा रहे है हे!
नारायणः नारायण
जय गुरुदेवा.............
Wednesday, April 11, 2012
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